गलत तो थी वो
देखो भाई, ताली तो दोनों हाथों से बजती है ,
बढ़ते बलात्कारों में तो लड़की की भी गलती है।
कुछ कारण तो रहा होगा पीछे उन लड़को के फ़ितूर में;
यूँ ही न थोड़ी रहे होंगे बलात्कार करने पर मजबूर वे।
हाथरस की बेटी ने शायद गलती से दिखा दी होगी अपनी मुस्कराहट ;
देखो कुछ 'सिग्नल' (Signal) तो दिए थे उसने,
यूँ ही थोड़ी वासना में भूल बैठे 'ठाकुर'
उस 'शूद्र' की रीढ़ की फड़-फड़ाहट।
गलती तो देखो दिल्ली की निर्भया की भी थी ,
करा तो था उसने भी एक बड़ा पाप !
रात में सड़क किनारे घूमना एक लड़के के साथ!
अब यह बलात्कार का न्यौता नहीं तो क्या था ?
बस लोहे का सरिया जनता में रोष जगा गया था।
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में गलती तो बच्ची के वालिदैन की भी थी;
बच्ची आठ (8) साल की ही सही,
सलीके से लिबाज़ ओढ़ने की समझ नहीं थी।
देखो भाई, गलत तो वो भी थी ....
हाथरस की निर्भया के सूट का गला शायद था बड़ा,
दिल्ली की निर्भया के साथ रात में लड़का था खड़ा ,
कठुआ की निर्भया ने शायद उम्र की नासमझी में ,
किसी रिवाज़ का निभाना- ना निभाना उसे उल्टा था पड़ा....
परंतु गलत तो थी वे ....
कभी यह प्रश्न उठा मेरे ख्वाब में ...
क्या रहा होगा इन निर्भया के देहांत का कारण ??
- दर्द के सैलाब से ?
- या ऊपर वाले की रेहम कि बचाया उन्हें समाज की हीन सोच के तालाब से ?
फ़ितूर = Madness
ReplyDeleteरीढ़ = Spine
सरिया = Rod
वालिदैन = Parents
सलीके = In mannerly way (ठीक ठंग में)
लिबाज़ = Dress
रिवाज़ = Custom
सैलाब = Overflow
रेहम = Compassion
😢
ReplyDeleteTruth is bitter...
DeleteReality is harsh!!
Expressed very well Kanchan!
ReplyDeleteReality is often disappointing.
Thank you for appreciation!!
DeleteAnd in my opinion there's always a possibility to alter the Future through change in the Present and improve the reality...
Truth is always bitter.. 👍
ReplyDeleteNot necessarily...
DeleteThis is today's truth owing to our patriarchal and orthodoxic majority/society.
Tomorrow's truth could be different... maybe
More parity;
Harmony;
Respect;
Sweet😅...
Lets hope & work together for such a future!!😄
Awesome Kanchan...
ReplyDeleteThank you Mayra for your appreciation and support!!
Delete😄👍