मेरी पहचान मैं ही जानू
“लग जा गले … कि फिर ये हसीन रात हो न हो ….”
वो भी दूसरी लड़कियों की तरह हज़ारों बार यह गाना सुन चुकी थी, साधना की सुंदरता और मनोज कुमार पर मोहित होना इस गाने का रीवाज़ बन चुका था। पर अनन्या तो साधना पर कायल हो रखी थी। अनन्या के कमरे में साधना, नूतन, हेमा मालिनी और कई मन-लुभावने वाली हीरोइनों ने दीवालों पर अपनी छोटी-छोटी कट्टिंग्स से सुंदरता बिखेर रखी थी। छोटी-छोटी इसलिए क्योंकि बड़े- बड़े पोस्टरों पर तो हीरो ने अपना दब-दबा बांध रखा था और परछाइयों में खड़ी छोटी-छोटी हीरोइनें अनन्या ने बांध रखी थी।
अनन्या की आवाज़ में मिठास थी पर उसके साथ रूकावट भी - तुतलाना ! बचपन में साफ़ न बोल पाना व माँ का अपना परिवार छोड़ किसी और के साथ भाग जाना - पड़ोस व रिश्तेदारी में उसका मज़ाक उड़ाने को व मनोबल तोड़ने को काफ़ी था। उस कठिन समय में उसकी सहेली ‘अनुराधा’ व दोस्त समान ‘पापा’ का साथ ही उसकी ज़िंदगी का मनोबल था। उसके पिता ने उसे माँ-बाप का स्नेह व संरक्षण और दोस्त का सहारा हर कदम पर दिया। परंतु उसकी सहेली अनुराधा की दोस्ती में बदलाव आ चुका था ….
9वीं कक्षा की बात है जब स्कूल के ग्राउंड में सब बच्चे खो-खो खिलाया जा रहा था। वहां लड़कों ने मज़ाक में अपना शारीरिक बल दिखने को अनुराधा को धक्का ज़ोर से दे दिया, अनन्या ने उसे गिरने से बचाने को अपनी बाहों में पकड़ लिया। अनुराधा बोली, “शुक्र है तुमने पकड़ लिया …” अनन्या की दिल की धड़कनें तेज़ होने लगी, जिन बाहों ने अनुराधा को पकड़ा था वे गरम होने लगे, वो बिना कुछ कहे क्लास की ओर भागी। उसे पहले से अंदेशा था की वह औरों से अलग है परन्तु अपनी इकलौती हम उम्र सहेली की ओर ये भवान्यें जान उसका दिल कचोट गया।
कक्षा बढ़ती गईं, दिन साल बन बीततें चले गए। अनन्या अनुराधा से बोलने की जगह उसे एकटक देखना व सुन्ना ज़्यादा पसंद करने लगी। उसे नहीं पता था की वह अब कब तक अपनी दोस्त को दोस्ती की नक़ाब में रख पायेगी।
21 जून 1996, अनुराधा शादी के जोड़े में सात-फेरों में अपनी ज़िंदगी के नई पड़ाव में कदम रखने जा रही थी। अनन्या उसके लिए बेहद खूबसूरत गुलदस्ते व एक ख़त में लिखी कविता लाई थी - ‘मेरी पहचान ?’ पर वह शादी के रिवाज़ ख़त्म होने से पहले ही गुलदस्ते संग एक ‘शुक्रिया’का ख़त छोड़ चली गयी। घर पहुँचते ही उसके आँसुओं का बाँध टूट गया, पापा को कहीं-न-कहीं इन आँसुओं के कारण का अंदेशा था। उन्होंने उसे सांत्वना देते हुए कहा, “बेटी ज़िंदगी कई चुनौतियाँ लाएगी, पर तुम्हें अपनी ज़िंदगी व पहचान का सामना स्वयं ही साहस व सच्चाई से करना है।” अनन्या उस दिन बहुत रोइ पर ज़िंदगी में आगे बढ़ने का फ़ैसला भी किया।
उसने अपनी कविताओं के माध्यम से अपना दिल खोला, अपनी ज़िंदगी की पहेली पूछी, “ढाई (2.5) अक्षर के प्रेम को दो (2) अक्षर के लिंग में कैसे समेटा समाज ने ?” उसने अपनी कविताएँ व लेख पत्रिकाओं और किताबों में ‘पृथिक’ उप नाम से छपवाएं। साहित्य जन ने उसे खुली बाँहों अपनाया।
ज़िंदगी चलती चली गयी, किताबें छपती चली गयी और दिन साल बन बीततें चले गए। अनुराधा 24 सालों से शादी के गहरे बंधन में थी। इन सालों में अनन्या ने भी कई विभिन्न पलों का एहसास किया: नई ख़ुशियाँ - अनुराधा की बेटी ‘ओजस्वी’ का जन्म ; अपार गम - पापा का स्वर्ग वास। पापा के गुज़र जाने के बाद अनुराधा ओजस्वी संग अपना ज़्यादातर समय अनन्या की तन्हाई बाँटने में लगाने लगी। ओजस्वी व अनन्या का रिश्ता गहरा हो रहा था - बचपन के स्नेह से लड़कपन की दोस्ती में, परन्तु ओजस्वी यौवन के प्रेम का रिश्ता भी अनन्या में ढूँढने लगी।
ओजस्वी ने अपने 21वें जन्मदिन पर अनन्या से अपने प्रेम का इज़हार कर दिया, “आपकी आँखें अब भी मेरी माँ को तलाशती है पर अब वो तलाश ख़त्म कर मेरे साथ ज़िंदगी की ख़ुशियाँ तलाशें ….।”
अनन्या ओजस्वी के इज़हार से ज़्यादा अपनी रुकी ज़िंदगी के एक तरफ़ा प्यार की सच्चाई जान आचम्भित हुई। ओजस्वी की निर्भय निगाहें अनन्या को वर्तमान की सच्चाई पर वापिस लायी। उसने ओजस्वी में प्यार को बेक़रार अनन्या की झलक देखी, ओजस्वी के पीछे भी उसे एक अनन्या की झलक देखी जो कमज़ोर व कायर थी और अपने प्रेम की पहचान व इज़हार करने में कभी सक्षम न हुई।
“लग जा गले … कि फिर ये हसीन रात हो न हो ….”
फ़ोन पर एक तरफ ये गाना बज रहा था, दूसरी ओर साहित्य पत्रिका में ‘पृथिका’ की नई कविता पढ़ी जा रही थी - ‘मेरी पहचान मैं ही जानू।’ अब अनन्या के कमरे में छोटी व बड़ी, दोनों तस्वीरों की मात्रा बढ़ गई थी: हीरोइनों की, पापा और अनुराधा के परिवार की और अपने प्यार ‘ओजस्वी’ की।


I have no words to say....I m literally spellpound. I love your words. Each nd every word.
ReplyDeleteThank you Nandini for such a sweet remark!😇
DeleteYour support & appreciation means a lot! ❤
beautiful dii
ReplyDeleteThank you Riddhi for appreciating my work!! 😇
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