Followers

Saturday, August 15, 2020

मैं तब भी लिखना चाहुँगी ....

मैं तब भी लिखना चाहुँगी  .... 


मैं तब भी लिखना चाहुँगी  ... 

जब मेरी नज़्म मेरी नब्ज़ पर भारी पड़ेगी ,

जब मेरा सों (100) पन्नों का ब्यान मुख़्तसर होगा ,

जब मेरी जाती, मेरा रंग,

मेरी त्वचा, मेरे ठंग,

सबको देखा जायेगा अलग, मेरी नज़्म के संग। 


मैं तब भी लिखना चाहुँगी  ... 

जब मेरी नज़्म बाज़ारू खेल न हो ,

जब मेरे विचार किसी से मेल न हो ;

जब मेरी नज़्म में किसी और की रसूख न मिले ,

कप-कपातें हाथ और शरीर में केवल भूख ही मिले,

मैं तब भी लिखना चाहुँगी। 


हाँ है मुझे डर की  ... 

यह दिल के अंगार ठंडे न हो जाये ,

यह ज़मानें की भ्रष्टता देख आंखें अंधी न हो जाये ,

दिल में इंसानियत की मशाल जलाकर चली थी 

वो भी देश , रिश्तें , धर्म की उलझ में ठंडी न हो जाये। 


पर मैं तब भी लिखना चाहुँगी  ... 

जब इस मेले सी दुनिया में 

देश की भक्ति बिकने लगेगी ,

रिश्तें खून के खून से ही रंगने लगेगे ,

धर्म के ठेके गली-गली खुलने लगेगे। 

जब मेरे विचार को, व्यवहार को, 

सोचने व खाने के आहार को,

मुझसे ही छीन कर मुझ पर ही प्रहार हो। 

मैं तब भी लिखना चाहुँगी। 


हाँ है मुझे डर कि  ... 

अलग राह चलने पर, पैर मौड़ दिए जायेगे,

अलग मंज़िल चुनने पर, हाथ तौड़ दिए जायेगे,

अलग राग अलापने पर, ज़ुबान काट दी जाएगी, 

अलग सपने देखने पर, आँखें नौंच दी जाएगी। 


सच कहूँ तो - हाँ मुझे डर लगता है ,

पर इन से भी ज़्यादा देहलाता है ,

ये ख्याल कि  ... 

डर लगने पर द्रढता तौड़ दूँगी ,

हाथ कप-कपाने पर कलम छोड़ दूँगी ,

क़त्लेआम के नज़ारों के ख़ौफ़ से आँखें मीच लूँगी ,

सच का कड़वा खूँट पी होंठ सील लूँगी। 


पर मैं तब तक लिखती रहूँगी -

जब तक कलम साथ दवात रहेगा ,

जब तक नब्ज़ में लहू बहेगा ,

जब तक दिल में इंसान बसेगा। 


यह दुनिया है ज़ालिम, कई अड़चनें सामने आएगी,

'समझदार' इंसान इंसानियत छौड़ देगा,

पर मैं मुर्ख बनकर ही सही ,

तब भी लिखती रहूँगी। 

10 comments:

  1. The lines epitomizes the notions of true independence terrifically. Yes, u nailed it again! loved it, a lot. Jai Hind!

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank you for your precious remark.
      It means a lot to me.
      Jai Hind!! 🇮🇳

      Delete
  2. Replies
    1. https://banidutt.blogspot.com/2018/10/instauration.html

      My self introductory 1st blog...
      Hope this will help you...
      😊

      Delete
  3. I APPRECIATE YOU. 👌🏻👌🏻👍🏻😍

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank you Sagar for appreciating me and my work!!
      😄😊

      Delete
  4. शब्दों का अटूट मिश्रण। बहुत खूब।
    Keep it up 👍

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank you Samad for appreciation!!😄
      I can say the same for you..😅

      Delete