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Thursday, August 15, 2024

आज भारत आज़ाद हुआ …

 आज भारत आज़ाद हुआ … 

-कंचन दत्त 


लहू बहा था पानी समान,

किले शिकस्त हुए बने शमशान,

कई वीरों-वीरांगनाओ के पीठ जड़ें थे तीर - कमान ।

बम - बारूद, लोहा - करकट,

हिंसा - अहिंसा सब जोड़ - तोड़कर ,

सबने की थी बड़ी मशक्क़त;

लगे थे लगभग 200 साल,

फिर जाकर मक़सद अपना कामयाब हुआ 

15 अगस्त 1947 में भारत आज़ाद हुआ ।


यह आज़ादी अनंत गगन की उड़ान भरे,

धर्म - जाति, रंग - रूप नहीं ,

सब भले इंसान बने ।


पर यह मान लेना कि आज़ादी तो लाज़मी थी,

पुश्तैनी विरासत थी, बड़ी बेअदबी है,

सीधे बोलूं तो इसकी क़द्र न करना, 

बड़ा अमानवीय है। 


गाली-गलौज कर, भाषा को अभद्र करना, 

छेड़-छाड़ व शोषण पर सब्र रखना,

संस्कृति - सिद्धांतों को भुला कर कब्र में गढ़ना,

ये आज़ादी पर प्रहार हैं।  

आज़ादी अंत नहीं, अनंत के भी पार है ,

दुनिया - समाज को सुखद रखना,

यही सबका सार है। 


बड़ी मेहनत मशक़्क़त से अपना देश आज़ाद हुआ,

भारत माँ की ज़ंजीरें तोड़, नए सफ़र का आग़ाज़ हुआ। 

उठो, बोलो और करो कुछ ऐसा कि नाम सुने सब दूर- दराज ,

विश्व में बोलते सब है पर गूँजे सबमें अपनी आवाज़।  


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